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घरेलू नुस्‍खे : पेट को हर समस्‍या से दूर रखेंगे घर में बने ये 4 चूर्ण

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पेट की समस्या कोई नयी समस्या नहीं है बल्कि हर घर में अधिकतर व्यक्ति इससे परेशान होते हैं। पेट की मुख्‍य समस्‍याओं में कमजोर पाचन तंत्र, कब्‍ज, गैस बनना हो सकता है। इनके लिए डॉक्‍टरी इलाज करने के साथ ही आप इन घरेलू नुस्‍खों को भी अपना सकते हैं। आज हम आपको पेट की आम समस्‍याओं के लिए इलाज के लिए घरेलू चीजों से बनने वाले 4 चूर्ण के बारे में बता रहे हैं। इनके इस्‍तेमाल से आपकी कई समस्‍याओं का खात्‍मा हो सकता है। आइए जानते हैं इनके बारे में

 गैस भगाने वाला चूर्ण




सामग्री 
  • 10 ग्राम सेंधा नमक
  • 10 ग्राम हींग
  • 10 ग्राम सज्जीखार ( शुद्ध )
  • 10 ग्राम हरड़ छोटी
  • 10 ग्राम अजवायन
  • 10 ग्राम काली मिर्च
विधि 
इस चूर्ण को बनाने के लिए आपको ज्यादा मेहनत की कोई आवश्यकता नहीं है बल्कि बस आप सारी सामग्री को इक्कठा करें और अच्छी तरह पीस लें। ध्यान रहें कि पाउडर महीन बनाना है। जब पाउडर बन जाए तो उसे किसी बारीक कपड़े या छन्‍नी से छान लें और फिर सुरक्षित किसी कांच की शीशी में भरकर रख लें।
आयुर्वेदिक पाचन चूर्ण दूर करे गैस और अपच
सामग्री 
  • जीरा 120 ग्राम  
  • सेंधानमक 100 ग्राम  
  • धनिया 80 ग्राम 
  • कालीमिर्च 40 ग्राम  
  • सोंठ 40 ग्राम 
  • छोटी इलायची 20 ग्राम
  • पीपर छोटी 20 ग्राम  
  • नींबू सत्व 15 ग्राम  
  • खाण्ड देशी 160 ग्राम 
विधि 
नींबू और खाण्‍ड को छोड़ कर बाकी की सभी सामग्रियों को पीस कर चूर्ण तैयार करें।  फिर उसमें नींबू निचोड़े और खाण्‍ड मिलाएं। इस मिश्रण को 3 घंटे के लिये एक कांच के बरतन में रख दें।  फिर इसका सेवन खाना खाने के बाद 2 से 5 ग्राम करें।
कब्‍ज से छुटकारा दिलाएगा घर में बना ये चूर्ण
अनियमित खानपान और जीवनशैली की वजह से लोग पेट की कई तरह की समस्‍याओं से पीड़ित हैं। इनसे निपटने के लिए अपनी लाइफस्‍टाइल में जरूरी बदलाव करने के साथ ही आप यहां बताए जा रहे चूर्ण को भी आजमा सकते हैं। इसके सेवन से आप कब्‍ज, एसिडिटी, पेट के मरोड़ और गैस से जड़ से छुटकारा पा सकते हैं। इस चूर्ण को बनाना बहुत आसान है।
सामाग्री
  • जीरा
  • अजवाइन 
  • काला नमक
  • मेथी
  • सौंफ 
  • हींग 
विधि
सबसे पहले जीरा, अजवाइन, मेथी और सौंफ को अलग-अलग धीमी आंच पर भून लें। भूनने के बाद इन्‍हें अलग-अलग बारीक पीस लें। इसके बाद एक बर्तन में काला नमक और आधा चम्‍मच हींग लें। अब इसमें जीरा, सौंफ, अजवाइन का पाउडर डाल लें। इन तीनों से कम मात्रा में मेथी पाउडर डालें। इस मिश्रण को अच्‍छी तरह मिला लें। ध्‍यान ये रखना है कि जीरा, अजवाइन और सौंफा की मात्रा समान होनी चाहिए। इसको अच्‍छी तरह से मिक्‍स करने के बाद किसी डिब्‍बे में रख लें। 
पेट के लिए रामबाण है यह चूर्ण
खाना खाने के बाद कई लोगों को बदहजमी हो जाती है। कभी-कभी तो पेट दर्द बर्दाशत से बाहर हो जाता है। आज हम आपको एक ऐसा हाजमे का चूर्ण बताएंगे, जिससे पाचन क्रिया भी ठीक रहती है। यह चूर्ण खाने वाले का जायका भी बढ़ाते हैं।
सामग्री 
  • अनारदाना 10 ग्राम
  • छोटी इलायची 10 ग्राम
  • दालचीनी 10 ग्राम
  • सौंठ 20 ग्राम
  • पीपल 20 ग्राम
  • कालीमिर्च 20 ग्राम
  • तेजपत्ता 20 ग्राम
  •  पीपलामूल 20 ग्राम
  • नींबू का सत्व 20 ग्राम
  • धनिया 40 ग्राम
  • सेंधा नमक 50 ग्राम
  • काला नमक 50 ग्राम
  • सफेद नमक 50 ग्राम
  • मिश्री की डली 350 ग्राम
विधि
सेंधा नमक, काला नमक, सफेद नमक, मिश्री और नींबू का सत्व को छोड़कर सभी सामान को कड़ी धूप में 2-3 घण्टे सुखा लें। फिर इसे मिक्सी में डालकर बारीक पीस लें।
इसके बाद बाकी सामान को अलग से बारीक पीस लें और फिर सभी सामानों के इस पाउडर को अच्छे से मिला लें। अब इसे किसी कांच की शीशी भरकर रख लें।

Health Tips : काली मिर्च का सेवन करता एक साथ कई बीमारियों का खात्मा

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आपकी रसोई में हमेशा मौजूद रहने वाली काली मिर्च सिर्फ मसालों को हिस्सा नहीं है, इसके औषधीय गुण भी हैं। अगर सुबह खाली पेट गुनगुने पानी के साथ काली मिर्च का सेवन किया जाए तो ये हमारे शरीर को बहुत सारे फायदे पहुंचा सकती है। आयुर्वेद में बताया गया है कि सुबह गर्म पानी के साथ कालीमिर्च का सेवन करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। इससे शरीर स्वस्थ बना रहता है। यह शरीर में बाहरी संक्रमण को पहुंचने से रोकती है और कप, पित्त और वायु पर नियंत्रण करती है।
फैट कम करे
काली मिर्च और गुनगुना पानी शरीर में बढ़ा हुआ फैट कम करता है। साथ ही यह कैलोरी को बर्न करके वजन कम करने में भी मदद करता है। इसके अलावा जुकाम होने पर काली मिर्च गर्म दूध में मिलाकर पीने से आराम मिलता है। इसके अलावा जुकाम बार-बार होता है, छीकें लगातार आती हैं तो काली मिर्च की संख्या एक से शुरू करके रोज एक बढ़ाते हुए पंद्रह तक ले जाएं फिर प्रतिदिन एक घटाते हुए पंद्रह से एक पर आएं। इस तरह जुकाम की परेशानी में आराम मिलेगा। 

कब्ज दूर करे
कब्ज के रोगियों के लिए पानी के साथ काली मिर्च का सेवन करना काफी फायदेमंद होता है। इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए एक कप पानी में नींबू का रस और काली मिर्च का चूर्ण और नमक डालकर पीने से गैस व कब्ज की समस्या कुछ ही दिनों में ठीक हो जाती है। 
स्टेमिना बढ़ाए
गुनगुने पानी के साथ काली मिर्च का सेवन करने से शरीरिक क्षमता बढ़ती है। साथ ही शरीर में पानी की कमी नियंत्रित होती है। यह शरीर के अंदर की एसिडिटी की समस्या को भी खत्म करता है।
डिहाइड्रेशन
अगर आपको डिहाइड्रेशन की समस्या है तो काली मिर्च का गुनगुने पानी के साथ सेवन करने से शरीर में पानी की कमी नहीं होती। इससे थकान का अनुभव भी नहीं होता है। इसके साथ ही स्किन में भी रूखापन नहीं आता।

प्रदूषण से बचने के लिए खूब खाएं गुड़, जानिए इसके गुणों के बारे में

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सर्दियों के मौसम की शुरुआत होते ही प्रदूषण का प्रकोप बढ़ने लगता है। इसकी वजह से कई लोगों में अस्थमाब्रॉन्काइटिसपल्मोनरी डिजीज और बच्चों में निमोनिया का खतरा बढ़ जाता है। प्रदूषण से निपटने में घरों में आमतौर पर उपलब्ध रहने वाला गुड़ काफी मददगार हो सकता है। दरअसलगुड़ प्राकृतिक रूप से शरीर से टॉक्सिन्स को बाहर निकालता है और गंदगीको साफ करता है। गुड़ भारतीय खानपान का हिस्सा रहा है। काफी लोग खाना खाने के बाद गुड़ जरूर खाते हैंक्योंकि यहपाचन में मदद करता है। साथ ही शरीर का मेटाबॉलिज्म ठीक रखता है। गुड़ अस्थमा के रोगियों के लिए फायदेमंद है क्योंकिइसमें ऐंटी-ऐलर्जिक गुण होते हैं।
  चम्मच मक्खन में थोड़ा सा गुड़ और हल्दी मिला लें और दिन में 3-4 बार इसका सेवन करें। यह शरीर में मौजूद जहरीलेतत्व को बाहर निकालेगा और उसे टॉक्सिन फ्री बनाएगा। गुड़ को सरसों तेल में मिलाकर खाने से सांस से जुड़ी दिक्कतों सेआराम मिलता है।
एक

गुड़ में पोषक तत्व


  • सुक्रोज 59.7% 
  • ग्लूकोज 21.8% 
  • खनिज तरल 26% 
  • जल अंश 8.86% 

 गुड़ में कैल्शियमफास्फोरसआयरन और कॉपर भी अच्छी मात्रा में मिलते हैं। गुड़ आयरन का प्रमुख स्रोत है और एनीमियाके मरीजों को भी इसके सेवन की सलाह दी जाती है।

बदलते मौसम में सर्दी-जुकाम से बचाएंगे सुबह-शाम के गरारे

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बदलते मौसम में सर्दी और जुकाम किसी को भी हो सकता है, लेकिन इसे गंभीरता से नहीं लिया जाता। सर्दी-जुकाम वैसे तो साधारण-सी समस्या है, लेकिन कई बार इसके गंभीर परिणाम भी होते हैं। कई लोग सर्दी-जुकाम के लिए एलोपैथिक दवाएं ले लेते हैं, जिनसे कुछ समय के लिए आराम मिलता है, लेकिन जैसे ही दवा का असर खत्म होता है, वे फिर से इसकी गिरफ्त में आ जाते हैं। सर्दी-जुकाम में घरेलू उपाय ज्यादा मददगार हो सकते हैं। इसके अलावा सुबह-शाम गरारे करने से भी आपको लाभ मिलेगा। बदलते मौसम में यह समस्या अधिक क्यों होती है और क्या हैं इसके लक्षण व उपचार?

बदलते मौसम में सर्दी-जुकाम की समस्या हवा में फैले कई वायरस और बैक्टीरिया के संक्रमण के कारण होती है। जब शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कम होने लगती है, तब सर्दी-जुकाम जैसी समस्या पहले सिर उठाती है। धूल, धुआं, प्रदूषण, एलर्जी, ठंडे से गरम या गरम से एकदम से ठंडे में जाना, धूप से आने के बाद ठंडी चीजें खा लेना आदि इसके प्रमुख कारण होते हैं।

ये हैं लक्षण
  • गले में खराश। 
  • सिर दर्द। 
  • सांस लेने में दिक्कत। 
  • हल्का बुखार आना।
  • आंखों में जलन।
  • शरीर में दर्द।

 मौसम में बदलाव के साथ ही शुरू कर दें सुबह-शाम के गरारे।
जब घर से बाहर जाएं, तो मास्क जरूर पहनें।
नाक के अंदर की सतह पर सरसों का तेल लगाएं।
सर्दी-जुकाम के शिकार लोगों का सामान इस्तेमाल करने और सीधे-सीधे संपर्क में आने से बचें।
आपसे किसी और को ये समस्या ना हो, इसके लिए छींकते समय अपने मुंह पर रूमाल जरूर रखें।
धूप से आने के बाद तुरंत ठंडा पानी न पिएं और न ही किसी ठंडी चीज का सेवन करें। 

सर्दी-जुकाम होने पर हल्का, सुपाच्य और पौष्टिक भोजन करें। भोजन में तरल पदार्थों की मात्रा अधिक रखें। अगर घर में किसी को सर्दी-जुकाम हो तो खाने में बड़ी इलायची, लौंग, काली मिर्च, दालचीनी, तेजपत्ता और अदरक जैसे गरम मसालों का इस्तेमाल जरूर करें। गर्म चीजों का सेवन करें और गुनगुना पानी पिएं या गुनगुने पानी में नमक डाल कर गरारा करें। इससे गले की सिकाई होगी और खराश भी दूर होगी। कोल्ड ड्रिंक आदि का सेवन न करें।

  • गर्म पानी से सुबह-शाम गरारे करने से आराम मिलेगा।
  • रात में सोते समय हल्के गुनगुने दूध में एक चम्मच हल्दी मिला कर पिएं, सर्दी-जुकाम में तेजी से लाभ होगा। 
  • सौंठ, छोटी पीपर तथा काली मिर्च को अच्छे से पीस कर इसका पाउडर तैयार करें और इसे शहद में मिला कर चाटें, आराम मिलेगा।
  • गर्म पानी, वेजिटेबल सूप के सेवन से लाभ होगा।

अचूक औषधि है जायफल, आयुर्वेद के अनुसार जानें जायफल के फायदे

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जायफल एक ऐसी जड़ी है, जो कई समस्याओं में बेहद लाभदायक साबित हुई है। आयुर्वेद के अनुसार जायफल एंटी-ऑक्सिडेंट और एंटी-बैक्टीरियल गुणों के कारण प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाता है। 
पाचन संबंधी विकारों में कारगर-गैस बनने या पेट फूलने जैसी समस्याओं के इलाज के लिए दो चम्मच जायफल पाउडर और एक-चौथाई चम्मच अदरक के पाउडर का मिश्रण बनाएं। भोजन करने से कुछ समय पहले इसका 1/8 चम्मच पाउडर हल्के गर्म पानी के साथ लें। 3-4 छोटी इलायची, सौंठ पाउडर और एक चुटकी जायफल डाल कर हर्बल चाय पीना फायदेमंद है। दस्त के इलाज में एक चम्मच खसखस, दो बड़े चम्मच चीनी, आधा चम्मच इलायची और जायफल मिला कर पीस लें। हर दो घंटे में एक चम्मच तैयार पाउडर का सेवन करें। मितली और अपच की स्थिति में एक चम्मच शहद के साथ 3-4 बूंदें जायफल का तेल मिला कर सेवन करने से आराम मिलता है।
खांसी-जुकाम को दूर भगाए-सर्दी के इलाज के लिए यह पुराना उपाय है। एक कप गर्म पानी में 1/4 चम्मच जायफल मिला कर पीना या चाय बना कर पीना फायदेमंद है। 
बरतें सावधानी-गर्म प्रकृति का होने के कारण सीमित मात्रा में (रोजाना 3-5 ग्राम) जायफल का सेवन करना ही बेहतर है। इसका अतिरिक्त सेवन एकाग्रता और स्फूर्ति की कमी जैसी समस्याओं को जन्म दे सकता है। इससे पेट दर्द, जी मिचलाना या  घबराहट हो सकती है। इसके अधिक सेवन से एलर्जी, दमा, कोमा जैसी गंभीर समस्या हो सकती है।

सर्दी-जुकाम ही नहीं पेट की तकलीफ में भी कारगर है अजवाइन, जानिए इसके ये 7 गुण

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अपने एंटी ऑक्सिडेंट और एंटी बैक्टीरियल गुणों के कारण अजवाइन गैस बनने, पेट दर्द, सर्दी-जुकाम जैसी तकलीफों के इलाज के लिए हर घर में इस्तेमाल की जाने वाली एक कारगर जड़ी-बूटी है। आइए जानते हैं इसके घरेलू उपायों के बारे में


पाचन प्रक्रिया को ठीक रखने के लिए अजवाइन और हरड़ को बराबर मात्रा में पीस लें। हींग और सेंधा नमक स्वादानुसार मिलाकर चूर्ण बना कर किसी बोतल में भर लें। इस चूर्ण का एक चम्मच गर्म पानी के साथ लें। 10 ग्राम पुदीने का चूर्ण, 10 ग्राम अजवाइन और 10 ग्राम कपूर एक साफ बोतल में डालकर धूप में रखें। तीनों चीजें गलकर पानी बन जाएंगी। इसकी 5-7 बूंदें बताशे के साथ खाने से मरोड़, पेट दर्द, जी मिचलाने जैसी समस्या में लाभ होगा।

 कब्ज होने पर 10 ग्राम अजवायन, 10 ग्राम त्रिफला और 10 ग्राम सेंधा नमक मिलाकर पीसकर चूर्ण बना लें। रोजाना इसमें से 3 से 5 ग्राम चूर्ण गुनगुने पानी के साथ लें, बहुत जल्द ही आराम होगा।


अपच होने पर एक कप पानी में एक चम्मच अजवाइन के बीज उबालें। थोड़ा ठंडा होने पर पिएं। एक ग्राम अजवाइन में एक चुटकी नमक मिलाकर चबा-चबा कर खाने से पेट में बनी गैस से होने वाले पेट दर्द में आराम मिलता है। तीन चम्मच अजवाइन के बीजों में नीबू का रस और थोड़ा सा काला नमक मिलाएं। इस मिश्रण को गुनगुने पानी के साथ दिन में दो बार खाएं। आधा लीटर पानी में एक-एक चम्मच अजवाइन और सौंफ के बीज डाल कर धीमी आंच पर पकाएं। ठंडा होने के बाद भोजन के बाद हर रोज पिएं।


एक कप छाछ के साथ एक चम्मच अजवाइन खाने से सर्दी-जुकाम के कारण बनने वाले कफ में राहत मिलती है। एक चम्मच अजवाइन के दानों को हाथ से मसल कर बारीक कर लें और इसे थोड़े से गुड़ के साथ मिलाकर टॉफी की तरह चूसकर सेवन करें, लाभ होगा। एक मुलायम कपड़े में थोड़ी सी अजवाइन डाल कर पोटली बना लें। इसे तवे पर गर्म कर चेस्ट की सिकाई करें, आराम मिलेगा।


एसिडिटी की समस्या होने पर एक गिलास गर्म पानी में एक-एक चम्मच जीरा और अजवायन मिलाकर उबालें। थोड़ा ठंडा होने पर पिएं। गर्म पानी के साथ सोंठ, अजवाइन और काला नमक मिलाकर खाने से आराम मिलता है। अजवाइन और काले नमक को छाछ के साथ मिलाकर सेवन करें, लाभ होगा।


एक कप पानी में एक चम्मच पिसी अजवाइन और थोड़ा सा नमक उबालें। पानी गुनगुना रह जाए तो उसे मुंह में लेकर कुछ देर रोकें और फिर कुल्ला कर फेंक दें। ऐसा दिन में तीन बार करें। अजवाइन भून कर पीस लें। इस तैयार चूर्ण से मंजन करने पर मसूढ़ों की बीमारियों में आराम मिलता है। लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि बेहतर लाभ के लिए विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए।

Home Remedies : वजन कम करने की अचूक दवा है काला जीरा, इसके ये 6 फायदे भी जानें

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रसोई में इस्तेमाल होने वाले मसालों में काला जीरा भी प्रमुखता से शामिल है, जो घर में इस्तेमाल किए जाने वाले जीरा का ही एक रूप है। लेकिन यह स्वाद में थोड़ी कड़वाहट लिए होता है और सदियों से हर्बल औषधि के रूप में छोटी-मोटी बीमारियों के इलाज में इसका इस्तेमाल किया जाता रहा है। आइए जानते हैं कि क्या-क्या हैं इसकी खूबियां, जो इसे सामान्य जीरे से अलग करती हैं:
वजन कम करने की अचूक दवा
तीन महीने तक काले जीरे के नियमित सेवन से शरीर में जमा हुए अनावश्यक फैट घटाने में काफी सफलता मिलती है। काला जीरा फैट को गला कर अपशिष्ट पदार्थों (मल-मूत्र) के माध्यम से शरीर से बाहर निकालने में सहायक है। इस तरह यह आपको चुस्त-दुरुस्त बनाने में सहायक साबित होता है। इसमें मौजूद मूत्रवर्धक प्रभाव की वजह से भी इसका नियमित सेवन वजन कम करने में सहायक साबित होता है।
इम्यून विकार करे दूर
यह हमारे शरीर में मौजूद इम्यून सेल्स को स्वस्थ सेल्स में बदल कर ऑटोइम्यून विकारों को दूर करने में सहायक है। काला जीरा हमारे शरीर में इम्यूनिटी बढ़ाने में बोन मैरो, नेचुरल इंटरफेरॉन और रोग-प्रतिरोधक सेल्स की मदद करता है। यह थकान और कमजोरी दूर करता है, शरीर में ऊर्जा का संचार करता है और उसे मजबूत बनाता है।
पेट की तकलीफ करे दूर 
अपने एंटीमाइक्रोबियल गुणों के कारण काला जीरा पेट संबंधी कई समस्याओं में लाभकारी है। पाचन संबंधी गड़बड़ी, गैस्ट्रिक, पेट फूलना, पेट-दर्द, दस्त, पेट में कीड़े होना आदि समस्याओं में यह काफी राहत देता है। देर से पचने वाला खाना खाने के बाद थोड़ा-सा काला जीरा खाने से तत्काल लाभ होता है। यह कब्ज दूर कर पाचन क्रिया को सुचारू बनाता है।
सर्दी-जुकाम में फायदेमंद
जुकाम, कफ, नाक बंद होने या श्वास नली में तकलीफ होने जैसी सर्दी-जुकाम की समस्या में काले जीरे का सेवन काफी फायदेमंद साबित होता है। यह शरीर से बलगम निकालने में मदद करता है। कफ से बंद नाक के लिए काला जीरा इन्हेलर का काम भी करता है। ऐसी स्थिति में थोड़ा सा भुना जीरा रूमाल में बांध कर सूंघने से आराम मिलता है। अस्थमा, काली खांसी, ब्रोंकाइटिस, एलर्जी से होने वाली सांस की बीमारियों में भी यह फायदेमंद है। स्वाइन फ्लू और वायरल जैसे बुखार के इलाज में भी काले जीरे का सेवन लाभकारी है।
सिरदर्द या दांत दर्द में दे आराम
काले जीरे का तेल सिर और माथे पर लगाने से माइग्रेन जैसे दर्द में लाभ होता है। गर्म पानी में काले जीरे के तेल की कुछ बूंदें डाल कर कुल्ला करने से दांत दर्द में काफी राहत मिलती है।
करे एंटीसेप्टिक का काम
काले जीरे के पाउडर का लेप लगाने से हर तरह के घाव, फोड़े-फुंसियां आसानी से भर जाते हैं। एंटी बैक्टीरियल गुणों के कारण यह संक्रमण फैलने से रोकता है। किसी भी समस्या में इसका सेवन विशेषज्ञ से सलाह लेकर ही करना चाहिए।
बरतें सावधानी
तासीर में गर्म होने के कारण काले जीरे का इस्तेमाल एक दिन में तीन ग्राम से ज्यादा बिल्कुल नहीं करना चाहिए। खासकर वे लोग, जिन्हें ज्यादा गर्मी लगती है या हाई ब्लडप्रेशर हो, गर्भवती महिलाओं और 5 साल तक के बच्चों के मामले में इस बात का खास ख्याल रखना चाहिए। बच्चे को तो एक ग्राम से ज्यादा काले जीरे का सेवन नहीं करना चाहिए। गर्भवती महिलाओं को विशेषज्ञ की सलाह से ही इसका सेवन करना चाहिए। अगर आप काले जीरे के चूर्ण का सेवन कर रहे हैं, तो जरूरी है कि इसे हल्के गर्म पानी के साथ रात में सोने से पहले लें। यानी भोजन के दो घंटे बाद ही इसका सेवन करें और इसके बाद कोई खाद्य पदार्थ न खाएं।

Health Tips : वेट लॉस ही नहीं बीपी और डायबिटीज में भी फायदेमंद है कटहल, जानें इसके ये 15 लाभ

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एक बहुत बड़ा और काफी स्वादिष्ट फल है, जो कई सारे गुणों का खजाना है। इसे खाने से वेट लॉस के साथ ही शुगर और ब्लड प्रेशर में भी राहत मिलती है। यह ट्रॉपिकल क्षेत्रों में खासतौर से पाया जाता है। आइए हम आपको फल का नाम भी बता देते हैं। यह लसदार फल और कुछ नहीं कटहल है। कटहल को अंग्रेजी में jackfruit कहते हैं। बड़े पैमाने पर इसकी सब्जी, कोफ्ता, कबाब, अचार बनाते हैं और इसे फल की तरह भी खाया जा सकता है। 
कटहल का वानस्पतिक नाम आर्टोकार्पस हेटेरोफिल्लस है। इसमें कई महत्वपूर्ण कार्बोहाइड्रेट के अलावा कई विटामिन भी पाए जाते हैं। कटहल का इस्तेमाल कई बीमारियों में किया जाता है। आइए जानते हैं इसके फायदे भी 
कटहल की पत्तियों की राख अल्सर के इलाज के लिए बहुत उपयोगी होती है। इसकी ताजा हरी पत्तियों को साफ धोकर सुखा लें और उसका चूर्ण तैयार कर लें। पेट के अल्सर में इस चूर्ण को खाने से काफी आराम मिलता है।
मुंह में छाले होने पर कटहल की कच्ची पत्तियों को चबाकर थूक देना चाहिए। यह छालों को ठीक कर देता है।
पके हुए कटहल के गूदे को अच्छी तरह से मैश करके पानी में उबाल लें। इस मिश्रण को ठंडा कर एक गिलास पीने से जबरदस्त स्फूर्ति आती है। यही मिश्रण यदि अपच के शिकार रोगी को दिया जाए तो उसे फायदा मिलता है।
डायबिटीज में कटहल की पत्तियों के रस का सेवन काफी फायदेमंद रहता है। यह रस हाई ब्लडप्रेशर के रोगियों के लिए भी उत्तम है। 
इसके छिलकों से निकलने वाला दूध यदि गांठनुमा सूजन, घाव और कटे-फटे अंगों पर लगाया जाए तो आराम मिलता है। इसके दूध से जोड़ों पर मालिश करने से जोड़ों के दर्द में आराम मिलता है।
कटहल के पे़ड की ताजी कोमल पत्तियों को कूट कर छोटी-छोटी गोली बना लें। इससे गले के रोगों में फायदा होता है। 
पके कटहल का सेवन करने से पेट साफ होता है। साथ ही, अपच की समस्या का निवारण हो जाता है।
कटहल की जड़ अस्‍थमा के रोगियों के लिए लाभदायक मानी जाती है। इसे पानी के साथ उबाल कर बचा हुआ पानी छान कर पीने से अस्‍थमा को कंट्रोल किया जा सकता है।
थायराइड के लिए भी कटहल उत्तम है। इसमें मौजूद सूक्ष्म खनिज और कॉपर थायराइड चयापचय के लिए प्रभावशाली होता है। यहां तक कि  यह बैक्‍टेरियल और वाइरल इंफेक्‍शन से भी बचाता है।
कटहल में मौजूद मैग्‍नीशियम हड्डी में मजबूती लाता है और ऑस्‍टियोपोरोसिस की समस्‍या से बचाता है। 
पके हुए कटहल के पल्प को अच्छी तरह से मैश करके पानी में उबालकर पीने से ताजगी आती है। कटहल में विटामिन ए पाया जाता है जिससे आंखों की रोशनी बढ़ती है और त्वचा निखरती है।
कटहल में अच्छी मात्रा में पोटैशियम होता है, जो हमारे दिल की सेहत दुरुस्त रखने में अहम रोल अदा करता है। दरअसल पोटैशियम मांसपेशियों के कामकाज में सामंजस्य बनाने और उन्हें बरकरार रखने में मदद करता है। इसके साथ ही यह हमारी बॉडी में सोडियम के स्तर को भी नियंत्रित करता है, जो हमारी धमनियों को नुकसान पहुंचा सकता है। 
इसमें विटामिन C, A और एंटीऑक्सिडेंट भी काफी मात्रा में पाए जाते हैं। यही वजह है कि शरीर की इम्‍यूनिटी बढ़ाने में कारगर रोल निभाता है। मजबूत इम्यूनिटी बीमारियों और इनफेक्शन को शरीर से दूर रखने में अहम रोल निभाती है।
यह उन लोगों के अच्छा विकल्प हो सकता है, जो अपना वजन घटाना चाहते हैं। इसमें फैट नहीं होता और कैलोरी भी काफी कम होती है। इसके साथ ही इसमें काफी मात्रा में पौष्टिक तत्व भी होते हैं। कटहल में प्रोटीन भी अच्छी मात्रा में होता है, जिससे पेट काफी देर तक भरा-भरा महसूस होता है।
कटहल के बीज का चूरन बना कर उसमें थोड़ा शहद मिलाकर चेहरे पर लगाने से चेहरे के दाग-धब्बे मिट जाते हैं। जिन लोगों की चेहरा रुखा और बेजान होता है उन लोगों को कटहल का रस अपने चेहरे पर लगाना चाहिए। इसकी मसाज तब तक करे जब तक यह सूख न जाए फिर थोड़ी देर के बाद अपना चेहरा पानी के साथ धो लें। झुर्रियों से निजात पाने के लिए कटहल का पेस्ट बना कर और उसमें एक चम्मच दूध मिलाकर धीरे-धीरे चेहरे पर लगाना चाहिए। फिर गुलाब जल या ठंडे पानी से चेहरा साफ कर लें। नियमित रूप से ऐसा करने से चेहरे की झूर्रियों से छुटकारा मिल जाता है।
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